एक संदेश है... Vinshi के लिए 🦚
🎵 आवाज़ के साथ सुनना • राधे राधे 🙏
एक बात... श्रीजी लालजू को साक्षी मानकर 🦚
तुमने कहा था — “सब उन्हीं का रूप है।”
अब मैं भी मानने लगा हूँ।
क्योंकि जब से तुमसे बात हुई है, लगता है कुछ मुलाक़ातें इत्तेफ़ाक़ नहीं होतीं — कृष्ण की कृपा होती हैं।
जो दिल से वृन्दावन की बात करती है,
संतों की सेवा की, लालजू श्रीजी की सेवा की —
जिसे लालजू से नज़र मिली तो बाक़ी सब छोटा लगने लगा। इतनी clarity, इतनी भक्ति… आजकल कहाँ मिलती है।

मुझे पता है किसी ने पहले दिल दुखाया था — जो सच्चा नहीं था।
मैं वो ग़लती कभी नहीं करूँगा।
मुझे पैसा या दिखावा नहीं चाहिए — बस एक ऐसा साथ, जहाँ दोनों कृष्ण की तरफ़ बढ़ें। अगर कभी जीवनसाथी की बात हो, तो मैं चाहूँगा वो मैं बनूँ — एक वैष्णव, जो तुम्हारी भक्ति बढ़ाए, कम न करे।
“दर्पण तुम्हें जब डराने लगे,
जवानी भी दामन छुड़ाने लगे…
मेरा सर झुका है, झुका ही रहेगा।”
— वही line, जो तुमने भेजी थी 🙏
मेरा सर भी झुका है — कृष्ण के आगे, और इस बात के आगे कि फ़ैसला पूरी तरह तुम्हारा है।
तो बस इतना पूछना था —
क्या इस सफ़र में, कृष्ण को साक्षी मानकर, तुम मेरे साथ चलोगी?
दोनों जवाब मंज़ूर हैं। respect दोनों में बराबर।